छत्तीसगढ के ग्रामीण परिवारों में उत्प्रवास की समस्या (बिलासपुर जिले के संदर्भ में)

 

डाॅ अर्चना सेठी

सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अघ्ययनशाला, प्ंा रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालयए रायपुर ; गद्ध 492010

*Corresponding Author E-mail: archanasethi96@gmail.com

 

ABSTRACT:

जन्म मृत्यु एवं उत्प्रवास किसी देश की जनसंख्या को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करता है एक भौगोलिक इकाई से दूसरे भौगोलिक इकाई में मानव की गतिशीलता को उत्प्रवास कहा जाता है। सामान्यतः पुरुषों के प्रवास में आर्थिक कारण की प्रबलता होती है वहीं महिला प्रवास में वैवाहिक एवं पारिवारिक कारण उत्तरदायी होता है।प्रवास सामान्यतया इन प्रक्रियाओं की सामान्य गति को छिन्न भिन्न कर देता है।इसका प्रभाव बहुत तेजी से होता है ।असके öारा कुछ महीने में ही करोडों लागों का स्थानांतरण हो जाता है तथा इससे लोगों के क्रियाकलापों तथा विवरण में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हो जाता है। ;बर्कलेद्ध प्रस्तुत शोध का उददेश्य उत्प्रवासी श्रमिकों के पलायन की प्रकृति एवं कारणों का अध्ययन करना शैक्षणिक स्तर एवं आर्थिकक्रियाकलापों का अध्ययन करना तथा उत्प्रवासीे श्रमिकों के समस्याओं का अध्ययन कर उत्प्रवास रोकने हेतु आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करना है। अध्ययन हेतु बिलासपुर जिले के 2015.16 के 260 परिवार का सर्वेक्षण किया गया उत्प्रवासियों से अनुसूची द्धारा जानकारी एकत्र की गई।बिलासपुर जिले के 5 विकासखंडों से 10 गांवों का चयन दैवनिदर्शन पद्धति द्धारा किया गया।प्रत्येक विकासखंड से 2 ग्राम का  चयन तथा प्रत्येक ग्राम से 26 परिवारों का चयन दैवनिदर्शन पद्धति द्धारा किया गया हैं। 260 परिवारों में से 1340 श्रमिकों ने उत्प्रवास किए। 2013 .14 में सर्वेक्षित परिवार के 1340 श्रमिकों ने उत्प्रवास किया जिसका 51ण् 27 पुरुष   एवं 48ण् 73 प्रतिशत महिला थे। क्ुलउत्प्रवासित श्रमिकों का 2ण् 53 प्रतिशत जिले के अंदर उत्प्रवास किये 3ण् 43 प्रतिशत जिले के बाहर तथा 94ण् 2 प्रतिशतण् राज्य के बाहर उत्प्रवास किये। सर्वेक्षित परिवार के उत्प्रवास करने वाले श्रमिक 1435 थे जिसका 51ण् 23 प्रतिशत पुरुष तथा 48ण् 77 प्रतिशत महिला थे।गंतब्य स्थल मेंउत्प्रवासित श्रमिकों का सर्वाधिक 32ण् 24 प्रतिशत भवन निर्माण 23ण् 95 प्रतिशत ईंटभटठा 21ण् 79 प्रतिशत सडकनिर्माण 18ण् 96 प्रतिशत उद्योग एवं 2 ण्39 प्रतिशत होटल एवं घरेलू कार्य में संलग्ण्न थे। लारेंज वक्रसे यह स्पष्ट है कि उत्प्रवासित श्रमिकों की विभिन्न ब्यवसाय में क्रियाशीलता मेंअसमानता है।गिनी गुणांक सूचकांक 0ण्61 है। गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रतिबö है तथा अनेक कार्यक्रम शासन संचालित कर रही है इसमें भारत निर्माण तथा मनरेगा प्रमुख है। उत्प्रवासित श्रमिकों को गंतब्य स्थल पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पडता है कई बार उन्हें बंधक बनाकर उनका शोषण किया जाता है।उत्प्रवास रोकने के लिए उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाय।

 

KEYWORDS: पलायनए  आर्थिक सशक्तिकरणए प्रवास।

 

 

 

प्रस्तावना

एक भौगोलिक इकाई से दूसरे भौगोलिक इकाई में मानव की गतिशीलता को उत्प्रवास कहा जाता है। ;ली एस द्ध जहां प्रवास होता है एवं जहां से प्रवास होता है दोनों स्थान सामाजिक एवं आर्थिक रुप से प्रभावित होता है।प्रवास किसी एक कारण में होने वाले वाले घटक का परिणाम नही है प्रवास अनेक कारण से प्रभावित होता है। ;फे्रंकलीनद्ध प्रवास मुख्यतः 4 स्तर पर होता है।1 गांव से गांव 2 गांव से नगर 3 नगर से नगर 4 नगर से गांव। ;सिंह एवं यादवद्ध भारत एवं छत्तीसगढ में मुख्यतःगांव से नगर की ओर पलायन पाया जाता है।सामान्यतःपुरुषों के प्रवास में आर्थिक कारण की प्रबलता होती है वहीं महिला प्रवास में वैवाहिक एवं पारिवारिक कारण उत्तरदायी होता है। भारत की जनसंख्या का आधा हिस्सा महिलाओं की है। छत्तीसगढ की श्रमशक्ति में महिला श्रमशक्ति का बहुत बडा हिस्सा है 2001 में कुलश्रमशक्ति का 25 ण्68 प्रतिशत महिला श्रमशक्ति था। जनगणना 1901 में भारत की 90 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीणक्षेत्र में निवास करती थी वह 1951 में यह 83 प्रतिशत हो गया।औद्योगीकरण के कारण यह वर्तमान में 70 प्रतिशत से कम हो गया।रोजगार की तलाश में लोग क्रमशः शहरों की ओर प्रवास कर गये।कृषिभूमि के घटने तथा आबादी बढने के कारण अधिकांश मजदूर रोजीरोटी कमाने शहर में पलायन कर गए।शिक्षा के विस्तार एवं गांवों में रोजगार की अनुपलब्धता शहरों की ओर पलायन का प्रमुख कारण है।महिला शिक्षा का विस्तार एवं महिलाओं में आर्थिकसशक्तिकरण की लालसा शहरों की ओर पलायन का मुख्य कारण है। ; रायद्ध

 

 

अध्ययन का उददेश्य

प्रस्तुत शोध का निम्नलिखित उददेश्य है।

1 उत्प्रवासी श्रमिकों के पलायन की प्रकृति एवं कारणों का अध्ययन करना।

2 उत्प्रवासी श्रमिक के शैक्षणिक स्तर एवं आर्थिकक्रियाकलापों का अध्ययन करना।

3 उत्प्रवासीे श्रमिकों के समस्याओं का अध्ययन कर उत्प्रवास रोकने हेतु आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करना।

 

शोध पद्धतिः

समंकों का संकलनः प्रस्तुत अघ्ययन प्राथमिक समंकों पर आधारित है। अध्ययन हेतु बिलासपुर जिले के 2015-16 के 260 परिवार का सर्वेक्षण किया गया उत्प्रवासियों से अनुसूची द्धारा जानकारी एकत्र की गई। बिलासपुर जिले के 5 विकासखंडों से 10 गांवों का चयन दैवनिदर्शन पद्धति द्धारा किया गया।प्रत्येक विकासखंड से 2 ग्राम का  चयन तथा प्रत्येक ग्राम से 26 परिवारों का चयन दैवनिदर्शन पद्धति द्धारा किया गया हैं। 260 परिवारों में से 1340 श्रमिकों ने उत्प्रवास किए

 

आंकडों का विश्लेषणः

आंकडों के विश्लेषण हेतु प्रतिशत तालिका एवं रेखाचित्रों का उपयोग किया गया है।

 

अध्ययन क्षेत्रः

अध्ययन हेतु बिलासपुर जिला का चयन किया गया है जहां से उत्प्रवास में निरंतर वृद्धि हो रही है।यह अध्ययन 2015 .16 के आंकडों पर आधारित है।

 

उत्प्रवासित श्रमिकों की सामाजिक आर्थिक स्थ्तिि

2013 .14 में सर्वेक्षित परिवार के 1340 श्रमिकों ने उत्प्रवास किया जिसका 51ण्27 पुरुष एवं 48ण्73 प्रतिशत महिला थे। क्ुलउत्प्रवासित श्रमिकों का 2ण् 53 प्रतिशत जिले के अंदर उत्प्रवास किये 3ण् 43 प्रतिशत जिले के बाहर तथा 94ण्2 प्रतिशतण् राज्य के बाहर उत्प्रवास किये। सर्वेक्षित परिवार के उत्प्रवास करने वाले श्रमिक 1435 थे जिसका 51ण्23 प्रतिशत पुरुष तथा 48ण्77 प्रतिशत महिला थे। तालिका 2

 

छत्तीसगढ में उत्प्रवास कृषि कार्यपर निर्भर करता है श्रमिक धान कटाई से लेकर धान बुआई तक उत्प्रवासित होते है।यह प्रक्रिया सितम्बर अब्टूबर से प्रारंभ होकर अपे्रल मई तक वापस घर जाते है। 9ण्4 प्रतिशत श्रमिक सितम्बर माह में अक्टूबर में 16ण्7 प्रतिशत श्रमिक नवंबर माह में 42ण्3 प्रतिशत श्रमिक उत्प्रवास किये 31ण्6 प्रतिशत श्रमिक दिसम्बर माह में उत्प्रवास किये। 5ण्6 प्रतिशत श्रमिक अप्रेल माह में 13ण्5 प्रतिशत श्रमिक मई माह में 52ण्3 प्रतिशत जून माह में तथा 28ण्6प्रतिशत श्रमिकजुलाई माह में वापिस घर लौटे।

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 62ण्4 प्रतिशत विवाहित 36ण्5प्रतिशत अविवाहित 1ण्1प्रतिशत विधवा विधुर परित्यक्ता है। कुल उत्प्रवासित श्रमिकों का 31ण्2 प्रतिशत अनुसुचित जाति 7ण्9 प्रतिशत जनजाति 52ण्3 प्रतिशत अन्य पिछडा वर्ग तथा 8ण्6 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग से हैं।

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 53ण्4 प्रतिशत शिक्षित है 46ण्6 प्रतिशत अशिक्षित है।शिक्षित श्रमिकों का 43ण्5 प्रतिशत केवल साक्षर 40ण्प्रतिशत प्राथमिक स्तर तक साक्षर तथा 8ण्4 प्रतिशत हाई स्कूल एवं 5ण्2 प्रतिशत हायर सेकेण्डरी तथा 2ण्1 प्रतिशत स्नातक स्तर तक साक्षर है।

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 27ण्3 प्रतिशत 0. 14 आयु वर्ग के 65ण्4 प्रतिशत कार्यशील आयुवर्ग 15.59 आयुवर्ग के तथा 7ण्3 प्रतिशत श्रमिक 59वर्ष से अधिक आयु वर्ग के है।

 

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 5ण्8छत्तीसगढ के अंदर तथा 94ण्2 प्रतिशत राज्य से बाहर उत्प्रवासित हुए जिसका सर्वाधिक 21ण्79 प्रतिशत उत्तरप्रदेश हरियाणा 12ण्16 प्रतिशत दिल्ली 10ण्97 प्रतिशत तथा पंजाब 8ण्58 प्रतिशत उत्प्रवासित हुए ।सबसे कम उत्प्रवास तमिलनाडु 2ण्61 प्रतिशत आंध्रप्रदेश 3ण्36 प्रतिशत तथा कर्नाटक राज्य में 3ण्51 प्रतिशत उत्प्रवास किए।तालिका 3

उत्प्रवासित श्रमिक 100 से 250 दिनों तक के लिए उत्प्रवास करते है। उत्प्रवासित श्रमिकों का 2ण्8 प्रतिशत 100 दिनों के लिए  25 प्रतिशत श्रमिक 100 से 150 दिनों के लिए 37 प्रतिशत श्रमिक 150 से 200 दिनों के लिए तथा 35ण्2 प्रतिशत श्रमिक 200से 250 दिनों के लिए उत्प्रवास किये। उत्प्रवासित श्रमिकों का 40ण्7 प्रतिशत स्वयं तथा 59ण्3 प्रतिशत ठेकेदारों के माध्यम से उत्प्रवास किए। उत्प्रवासित श्रमिक उत्प्रवास के लिए बस तथा रेल का उपयोग करते हंै। 81ण्5 प्रतिशत श्रमिक बस एवं रेल दोनों माध्यम 5ण्4 प्रतिशत ने बस के öारा तथा 13ण्1 प्रतिशत श्रमिकों नें रेल का उपयोग उत्प्रवास के लिए किया। उत्प्रवासित श्रमिक अधिकतर बाहर राज्य से आगामी वर्ष के लिए अग्रिम सुविधा लेते है। उत्प्रवासित श्रमिकों का 22ण्3 प्रतिशत श्रमिक अग्रिम सुविधा लिए शेष 77ण्7 प्रतिशत श्रमिक स्वतंत्र रुप से उत्प्रवास किए।उत्प्रवासित श्रमिकों का उत्प्रवास का कारण गरीबी एवं निम्न आय एवं रोजगार का अभाव है उत्प्रवासित श्रमिकों का 46ण्9 प्रतिशत श्रमिक परिवार की र्वािर्षक आय 20000 रु वार्षिक से कम है।परिवार का औसत आकार 5सदस्य या उससे अधिक है अर्थात प्रतिब्यक्ति वार्षिक आय 5000रु या उससे कम ही है 53ण्1 प्रतिशत श्रमिकों की वार्षिक आय 20000रु से 30000रु तक है अर्थात प्रतिब्यक्ति वार्षिक आय 6000रु तक है।

 

गंतब्य स्थल में उत्प्रवासित श्रमिकों की आथर््िाक क्रियाशीलता

उत्प्रवासित श्रमिकों का सर्वाधिक 32ण्24 प्रतिशत भवन निर्माण 23ण्95 प्रतिशत ईंटभटठा 21ण्79 प्रतिशत सडकनिर्माण 18ण्96 प्रतिशत उद्योग एवं 2ण्39 प्रतिशत होटल एवं घरेलू कार्य में संलग्ण्न थे।कार्य स्थल पर इन्हें आवास झोपडी एवं पेयजल के अतिरिक्त कोईसुविधा उपलब्ध नहीं कराया जाता। उत्प्रवासित श्रमिकों का 3ण्1प्रतिशत 100 दिनों के लिए 24ण् 3 प्रतिशत 100 से 150 दिनों के लिए 40ण्3 प्रतिशत श्रमिक 150 से 200 दिनों के लिए तथा 32ण्3 प्रतिशत श्रमिक 200 से 250 दिनों के लिए उत्प्रवास किए।उत्प्रवासित श्रमिक 5000 रु से 30000रु तक बचत कर अपने घर लाते है।उत्प्रवासित श्रमिकों का सर्वाधिक 52ण्3प्रतिशत ने 10000रु तक बचत किया सबसे कम 8ण्प्रतिशत ने 30000रु तक बचत किया तथा 0ण् 8 प्रतिशत ने बचत नहीें किया।तालिका4

                                      

 

उत्प्रवास के कारण:प्रवास को प्रभावित करने वाले कारकों को जनांकिकीविदों ने 2 भागों में बांटा है देसाई।

 

1 आकर्षक कारकः वे कारक जो मनुष्य को अपना निवासस्थान छोडकर अन्यत्र बसने को प्रोत्साहित करते है अर्थात वे कारक जो मनुश्य को अपनी ओर आकर्शित करते है।वे निम्न है

1 रोजगार एवं ब्यवसाय के श्रेष्ठ अवसर

2 अधिकआय अर्जित करने के अवसर

3 मनोरंजन के साधनों की उपलब्धता

4 शिक्षा तकनीकी शिक्षा तकनीकी प्रशिक्षण तथा आवास की सुविधाएं

5 स्वास्थ्यप्रद जलवायु

6उन्नत नगरीय जीवन

 

2 प्रत्याकर्षक कारकः वे कारक जो मनुष्य को अपना निवासस्थान छोडकर अन्यत्र बसने को बाध्य करते है अर्थात वे कारक जो मनुष्य को अपना निवासस्थान छोडने को मजबूर करते है।

1रोजगार के साधनों का अभाव

2 शिक्षा तकनीकी शिक्षा तकनीकी प्रशिक्षण तथा आवास का अभाव

3 मनोरंजन के साधनों की उपलब्धता

4 अधिकआय अर्जित करने के अवसर का अभाव

5सामाजिक तिरस्कार

6असामाजिक तत्वों का आतंक

 

उत्प्रवास रोकने के उपाय:

गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रतिबö है तथा अनेक कार्यक्रम शासन संचालित कर रही है इसमें भारत निर्माण तथा मनरेगा प्रमुख है। उत्प्रवासित श्रमिकों को गंतब्य स्थल पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पडता है कई बार उन्हें बंधक बनाकर उनका शोषण किया जाता है।उत्प्रवास रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय अमल में लाना चाहिए।

 

1 गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाय।

2 उद्यमिता एवं कौशल उपाय

3 औद्योगिक प्रशिक्षण

4 स्वरोजगार के लिए प्रेरणा

5 स्वसहायता समूहों की स्थापना

6 कुटीर उद्योग धंधों की स्थापना

7 पूरक उद्योगों की स्थापना जैसे पशुपालन मुर्गीपालन रेशमकीट पालन मत्स्यपालन आदि

 

निश्कर्ष

छत्तीसगढ एक कृषिप्रधान राज्य है। बिलासपुर जिला भी कृषिप्रधान जिला है। कृषि में मौसमी बेरोजगारी पायी जाती है। कृषि कार्य अधिकतम 6 माह तक सम्पन्न होता है शेष समय ग्रामीण बेरोजगार रहते हैं जिसके कारण वे राज्य के बाहर कार्य के लिए उत्प्रवास कर जाते है जहो वे अनेक समस्याओं के शिकार होते है।शासन की रोजगारप्रधान योजनाओं के साथ ही ग्रामीणों का जागरुक होना आवश्यक है तभी इस समस्या को दूर किया जा सकता है।इस दिशा में उन्हें स्वरोजगार के लिए पे्ररित करना चाहिए जिससे उन्हें जिवकोपार्जन के लिए उत्प्रवास नहीं करना पडेगा ।पुरुषों के प्रवास में आर्थिक कारण की प्रबलता होती है वहीं महिला प्रवास में वैवाहिक एवं पारिवारिक कारण उत्तरदायी होता है।

 

संदर्भ

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सिंहए जयदेवए यादवए अजब एएवं सिंहए एस ण्डीण् ;2006द्ध ग्रामीण नगरीय प्रवासनए कारण एवं प्रतिफलः शिकोहाबाद के संदर्भ मेंए सामाजिक सहयोगए अंक 59 वर्ष 15 एप क्रए 28 34

W.G. Barelay: Techniques of Population Analysis,p241.

 

 

 

Received on 10.12.2017       Modified on 15.02.2018

Accepted on 25.02.2018      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2018; 6(1): Page 89-94 .